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सिंसियो योग में ऐशोसांस कैसे ली जाती है की व्याख्या कुछनाकर भाईजी द्वारा श्वास प्रक्रिया के 2 मुख्य आयाम हैं 1. श्वास लेने छोड़ने का समय 2. श्वास लेने छोड़ने की गति प्रथम बिन्दु भक्ति को दर्शाता है जो कि कलियुग में सम्भव ही नहीं तो उसको सिंसियो योग में स्थान ही नहीं दिया गया दूसरे बिन्दु को ही महत्व दिया गया है यानि श्वास लेने छोड़ने की गति। धीरे धीरे श्वास लेनी है धीरे धीरे ही छोड़नी है। यानि सारा ध्यान सिर्फ गति को धीरे रखने में ही निहित है। सांस को ना तो रोकना है ना ही खींचना है ना ही आँखें बंद होनी चाहिए ना ही दुनियां से संबंध विच्छेद होना चाहिए। अभ्यास के दौरान हाथ को ऊपर ले जाना जब सांस अन्दर कर रहे हैं और नीचे लाना है जब सांस छोड़ रहे हैं। सांस को अपनी पूर्ण कैपेसिटी में भरना है। वो अंदर कहां जाता है क्या करता है से कोई मतलब नहीं होता बस हवा धीरे धीरे जाए अन्दर भी बाहर भी। मूल उद्देश्य सिंसियो योग का है मन सोच बुद्धि शरीर वा वांछित ऊर्जा श्रम करने हेतु पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो ना कम ना ज्यादा। यहां ज्ञान विज्ञान को सीखना ...